पिछले 10 वर्षों में भारत में स्ट्रोक की घटनाओं में काफी वृद्धि हुई है। अध्ययनों से पता चलता है कि हमारे देश में लगभग 1.8 मिलियन लोग हर साल स्ट्रोक से पीड़ित होते हैं। भारत में स्ट्रोक सुधार में बढ़ती चिकित्सा प्रगति के बावजूद, स्ट्रोक की संख्या तदनुसार बढ़ रही है।

संतुलित आहार

संतुलित और पौष्टिक आहार लेने से स्ट्रोक को रोका जा सकता है। सैचुरेटेड फैट से भरपूर भोजन करना शरीर के लिए अच्छा होता है।

यह धमनियों में रक्त के थक्कों के जोखिम को कम करने में मदद करता है। स्ट्रोक से बचने के लिए अपने आहार में फल, सब्जियां, नट्स, साबुत अनाज, बीज और बीन्स शामिल करें।

शारीरिक गतिविधि

स्ट्रोक की समस्या और हमारी शारीरिक गतिविधि के बीच गहरा संबंध है। रोजाना व्यायाम करना स्ट्रोक होने की संभावना को कम करने का एक तरीका है।

स्विमिंग, जॉगिंग, योगा, साइकिलिंग जैसी एक्सरसाइज करते समय ये शरीर में गुड फैट की मात्रा को बढ़ाते हैं।

इसलिए रोजाना कम से कम 30 मिनट मध्यम व्यायाम करें।

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नमक सेवन की मात्रा

एक वयस्क व्यक्ति के लिए एक दिन में 5 ग्राम या उससे कम नमक डालना अच्छा होता है।

यह रक्तचाप और हृदय रोग, स्ट्रोक और कोरोनरी हार्ट अटैक जैसी शारीरिक समस्याओं के विकास के जोखिम को कम करने में मदद करता है।

तो आप नमक का सेवन कम करके हाई ब्लड प्रेशर को कम कर सकते हैं।

धूम्रपान ना करें

सिगरेट के धुएं से निकलने वाला विष निकोटिन रक्त को नुकसान पहुंचाता है। तो खून के थक्के जमने की संभावना ज्यादा होती है,

धूम्रपान से फेफड़े की बीमारी, हृदय रोग और कैंसर होने की भी संभावना होती है। इसलिए धूम्रपान से बचना ही बेहतर है।

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वजन घटना

30 वर्ष से अधिक आयु के बीएमआई वाले लोगों में कम वजन वाले लोगों की तुलना में स्ट्रोक होने की संभावना अधिक होती है।

अनुसंधान से पता चलता है कि यह मौका दो से तीन गुना अधिक है, और यह कि मोटापा मधुमेह और उच्च रक्तचाप जैसी विभिन्न शारीरिक समस्याओं का कारण बनता है।

इससे हमें स्ट्रोक होने की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए कोशिश करें कि रोजाना एक्सरसाइज करके वजन कम किया जाए।

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शारीरिक और मानसिक तनाव

तनावपूर्ण स्थितियों से स्ट्रोक का खतरा बढ़ सकता है। पर्याप्त आराम, लंबे समय तक काम, लगातार तनाव या शारीरिक तनाव से स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है।

क्‍योंकि यह शरीर में ब्‍लड प्रेशर को बढ़ाता है। इसका अचूक उपाय है ध्यान।

मेडिटेशन की मदद से तनाव, क्रोध, आक्रोश जैसी भावनाओं को नियंत्रित किया जा सकता है। ये सभी स्ट्रोक के जोखिम को कम करने में मदद कर सकते हैं।

मधुमेह

मधुमेह भी स्ट्रोक के लिए एक प्रमुख जोखिम कारक है।

शरीर में उच्च रक्त शर्करा का स्तर रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाता है। इस प्रकार शरीर में रक्त के थक्के जमने की संभावना होती है।

स्ट्रोक को रोकने के लिए हमें मधुमेह को नियंत्रित करने की जरूरत है। इसके लिए आपको बार-बार अपने ब्लड शुगर लेवल की निगरानी करने की जरूरत है।

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अच्छी नींद

जो लोग स्ट्रोक के जोखिम को कम करना चाहते हैं उन्हें हर रात सही मात्रा में नींद लेने की जरूरत है।

एक अध्ययन के अनुसार, जो लोग 6 घंटे से कम सोते हैं, उन्हें 45 वर्ष से अधिक उम्र में स्ट्रोक होने की संभावना अधिक होती है।

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सकारात्मक रहें

हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों के एक अध्ययन के अनुसार, सकारात्मक दृष्टिकोण वाले लोगों को दिल का दौरा या स्ट्रोक होने की संभावना कम होती है। इसलिए हमेशा सकारात्मक विचार रखें।

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